मंदिरो ,घरों मे श्रद्धा भाव, विधि विधान एवं सामूहिक रूप से हरितालिका तीज का हुआ पूजन,
रेहटी : पूरे नगर में जगह जगह मंदिर एवं घरों में हरतालिका तीज का पूजन महिलाओं एवं कुंवारी कन्याओं ने निर्जल व्रत रखकर किया,
व्रत एक दिन पहले रात को ककड़ी (खीरा) खा कर शुरू होता हे जो सुबह से ही स्नान कर पूजन की तैयारी कर पूरे दिन निर्जला रहती हे जिसके बाद शाम को शंकर भोलेनाथ का पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूरे श्रद्धा भाव से हरतालिका व्रत पूजन शुरू किया गया। पूजन में पाँच आरतियाँ होती हे। वही रेहटी के सभी मंदिर में सामूहिक रूप से कई वर्षों से होती आ रही हे। जब मंदिर में सामूहिक रुप से हरतालिका तीज व्रत का पूजन शुरू हुआ,
मंदिरो एवं घरों पर अनेक समाज की महिलाएं एवं कुंवारी लड़कियां इकट्ठे होकर भगवान भोलेनाथ की पूजन करती। सभी जगह आकर्षक रंगीन फुलेरे लगाए गए, पूजन पंडित के द्वारा कराया गया और पूजन के बाद आरती हुई तथा रात भर महिलाओं ने भगवान आशुतोष के एवं अन्य भगवान के भजन गाए। आख़री आरती सुबह सुबह कर नदी में फुलेरा एवं मिट्टी की शिव पार्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया और प्रसाद बांटा गया


