दुर्गम जंगल और 5 किलोमीटर ट्रक्टर से सफर तय कर अमराझिरी आश्रम पहुंचे निराहारी संत दादा गुरु, अमरानंद जी त्यागी जी गुरुजी से की भेंट

बुधनी विधानसभा क्षेत्र के प्रसिद्ध अमरागुरु तीर्थ अमराझिरी आश्रम में शनिवार को आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। निराहारी संत दादा गुरु दुर्गम जंगलों और लगभग 5 किलोमीटर के कठिन मार्ग को ट्रैक्टर एवं पैदल तय कर आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने पूज्य श्री श्री 108 अमरानंद जी त्यागी जी गुरुजी से भेंट कर पूजा-अर्चना की तथा दोनों संतों के बीच आध्यात्मिक चर्चा हुई।
घने जंगलों और रमणीय पहाड़ियों के बीच स्थित अमराझिरी आश्रम क्षेत्र का प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र है। लोकमान्यताओं के अनुसार यह वीर आल्हा-ऊदल के गुरु अमरागुरु की तपोस्थली मानी जाती है, जिससे इस स्थान का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है।
आश्रम की स्थापना पूज्य परमहंस संत श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन टाटम्बरी जी गुरु महाराज ने की थी। वर्तमान में आश्रम की गुरु गादी पर पूज्य श्री श्री 108 अमरानंद जी त्यागी जी गुरुजी विराजमान हैं। उनके सानिध्य में आश्रम निरंतर धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
बारिश के मौसम में आश्रम तक पहुंचना अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहता है। श्रद्धालुओं को वाहन छोड़ने के बाद लगभग 5 किलोमीटर तक जंगल और पहाड़ी मार्ग से पैदल यात्रा करनी पड़ती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर दर्शन एवं साधना का लाभ लेते हैं।
आश्रम में दादा गुरु ने गुरु स्थल पर साधना भी की। बताया गया कि वे पूर्व में भी कई बार यहां आ चुके हैं तथा उनके साथ शासन के कई मंत्री भी इस पावन धाम के दर्शन कर चुके हैं।
आश्रम प्रवास के बाद दादा गुरु बाया स्थित विंध्यवासिनी कॉन्वेंट स्कूल पहुंचे। यहां ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों ने आरती उतारी। इस अवसर पर दादा गुरु ने आध्यात्मिक प्रवचन देते हुए धर्म, सेवा, संस्कार और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।