August 4, 2026

भागवत कथा के अंतिम दिन शोभा यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

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भगवान का भक्त कभी निर्धन नहीं होता, सुदामा तो भगवान के मित्र थे-भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा
सीहोर। भगवान का भजन करने वाला, जाप करने वाला कभी निर्धन नहीं हो सकता, सुदामा तो भगवान के मित्र थे, यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ। संतोष सबसे बड़ा धन है। सुदामा की मित्रता भगवान के साथ नि:स्वार्थ थी। उन्होंने कभी उनसे सुख, साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की, लेकिन सुदामा की पत्नी द्वारा पोटली में भेजे गए चावलों में भगवान श्रीकृष्ण से सारी हकीकत कह दी और प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को सब कुछ प्रदान कर दिया। उक्त विचार शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में अग्रवाल महिला मंडल के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और शाम को चार बजे भव्य शोभा यात्रा शहर के छावनी में निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
उन्होंने कहा कि भगवान पर विश्वास और भरोसा होना चाहिए मजबूत जिस प्रकार माता रुकमणी को अपने कृष्ण पर विश्वास था कि वह आऐंगे और उनके मित्र सुदामा को आस्था थी कि मैंं भगवान का ध्यान और मनन करता रहूंगा तो मेरे परिवार को वैभव प्राप्त होगा। ईश्वर पर आस्था रखना चाहिए जो भी भक्त ईश्वर पर आस्था और विश्वास करता है उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
भागवत कथा में दी अन्य सीख
संस्कार युक्त जीवन जीने से मिलती है मुक्ति। भागवत भूषण पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि जो व्यक्ति संस्कार युक्त जीवन जीता है वह जीवन में कभी कष्ट नहीं पा सकता। व्यक्ति के दैनिक दिनचर्या के संबंध में उन्होंने कहा कि ब्रह्म मुहूर्त में उठना, दैनिक कार्यो से निवृत होकर यज्ञ करना, तर्पण करना, प्रतिदिन गाय को रोटी देने के बाद स्वयं भोजन करने वाले व्यक्ति पर ईश्वर सदैव प्रसन्न रहते हैं। श्रीमद भागवत कथा सुनने वाले के सभी दुख दर्द क्षण में दूर हो जाते हैं। कहा कि हमें श्रीराम और श्रीकृष्ण के बताए मार्ग का अनुसरण अपने जीवन में करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने की सीख दी। भगवान शंकर पर विश्वास रखे। भक्त के रोम-रोम में जब भक्ति होती है तो कंकर-कंकर शंकर हो जाता है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने बताया कि कथा के अंतिम दिन मंडल सहित अन्य क्षेत्रवासियों ने भागवत भूषण पंडित श्री मिश्रा का भव्य स्वागत किया इसके अलावा शाम को भव्य शोभा यात्रा निकाली गई थी, जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिलाएं शामिल थी।

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