पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, तहसील के कामकाज पर पड़ा असर

किसानों की बढ़ी परेशानी, खसरा-खतौनी की नकल और राजस्व संबंधी कार्य ठप
मुकेश मेहता
रेहटी। मध्यप्रदेश पटवारी संघ की रेहटी इकाई ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। लंबे समय से लंबित मांगों के निराकरण नहीं होने से नाराज पटवारियों ने सामूहिक रूप से काम बंद कर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हड़ताल के पहले दिन पटवारी संघ के सदस्यों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार सपना झिल्लोरिया को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
पटवारी संघ के प्रवक्ता हर्षवर्धन परमार ने बताया कि संघ पिछले लगभग एक वर्ष से विभिन्न माध्यमों से शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी न्यायोचित मांगें रखता आ रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण पहले सांकेतिक कामबंद आंदोलन किया गया और अब अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
संघ की प्रमुख मांगें
वेतन विसंगति का शीघ्र निराकरण।
पदोन्नति एवं सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान।
कार्य के अनुरूप सुविधाएं एवं संसाधन उपलब्ध कराना।
लंबित भत्तों एवं देयकों का भुगतान।
अन्य न्यायोचित मांगों का शीघ्र निराकरण।
सबसे अधिक किसान हुए प्रभावित
पटवारियों की हड़ताल का सीधा असर तहसील क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों पर दिखाई देने लगा है। खसरा, खतौनी, बी-1 नकल, नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी सहित कई राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो गए हैं। दस्तावेजों के लिए तहसील और पटवारी हलकों के चक्कर लगाने वाले किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा।
इन दिनों कृषि कार्यों और विभिन्न शासकीय योजनाओं के लिए राजस्व अभिलेखों की आवश्यकता अधिक रहती है। ऐसे में किसानों को जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं मिलने से उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। यदि हड़ताल लंबी चली तो फसल ऋण, भूमि संबंधी प्रक्रियाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर भी व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
प्रशासन और पटवारी संघ के बीच अभी तक किसी समाधान के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में आमजन और किसानों की निगाहें अब शासन-प्रशासन की आगामी पहल पर टिकी हुई हैं।