सीहोर जिले में लगा प्रदेश का सबसे बड़ा एक दिवसीय मेला
पुरातन काल से लगता आ रहा है मेला
12 पिल्लरों पर रखी हैं आदिवासी आराध्य देव की सपाट शीला इसीलिए इस जगह को बारहखंबा कहा जाता है।

सीहोर जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवपुरा में लगता है प्रदेश का एक दिवसीय मेला जिसे बारहखंबा मेले के नाम से जाना जाता हैं। दिवाली के दूसरे दिन हर वर्ष ये मेला लगता है लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण के कारण बुधवार को लगा है। यहां बहती है दूध की नदी,पशुओं की सेहत के लिए शिला का दुग्धाभिषेक करते हैं पशुपालक
पशुओं की अच्छी सेहत के लिए पशुपालक अपने एक दिन का सारा दूध आदिवासी आराध्य देव की सपाट शीला पर अर्पित करते हैं।लाखों की संख्या में किसान पशुपालक मेले में पहुंचे और हजारों लीटर दूध आदिवासी आराध्य देव की सपाट शीला को समर्पित किया। यहां प्रदेश का सबसे बड़ा मेला आयोजित किया जाता है। एक दिवसीय मेले में देखते ही देखते लाखों क्विंटल दूध अर्पण किया जाता है। ऐसा लगता है मानो दूध की नदी बह निकली हो। कोरोना महामारी की वजह से बीते दो सालों से बाराखंबा में आयोजित होने वाला मेला प्रभावित हो रहा था। लेकिन अब महामारी खत्म हो गई है। इस वजह से इस बार मेले में जमकर भीड़ उमड़ी। कहा जाता है कि बाराखंबा देव स्थान पर दूध चढ़ाने से पशु निरोगी रहते हैं।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आते हैं श्रद्धालु।

आज मेले में 5 लाख के लगभग श्रद्धालु पहुंचे और आदिवासी आराध्य देव की सपाट शीला पर दूध चढ़ाया।
यहां हजारो क्विंटल दूध के चढ़ावे से यहां मंदिर के पीछे दूध की दो धाराएं बह निकलती है। यहां से दूध एक नहर के रूप में निकलता है।मेले में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी ना हो जिस पर जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। राजस्व प्रशासन पुलिस प्रशासन सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
