August 3, 2026

सांपों की अदालत: यहां सौ वर्षों से कांडी की (विशेष)धुन पर हाजिर होते हैं नाग

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सीहोर के ग्राम लसूडिय़ा परिहार में सालोंं से चली आ रही नागों की अदालत में नाग मानव शरीर में आकर बताते हैं डसने का कारण

जमाना भले ही चांद और मंगल ग्रह की बात करें पर सीहोर के ग्राम लसूडिय़ा परिहार में आज भी सर्पदंश से पीडि़त लोग स्वस्थ होने के लिए मंदिर में आते है। सीहोर के ग्राम लसूडिय़ा परिहार में सालोंं से नागों की अदालत लगती है, जहां पेशी पर नाग स्वयं मानव शरीर में आकर डसने का कारण बताते हैं।
मप्र की राजधानी भोपाल के सीहोर जिले से मात्र 15 किलोमीटर दूर दीपावली के दूसरे दिन पड़वा को यह नजारा देखने को मिल रहा है। कई तो केवल इसी रहस्य को देखने गांव पहुंचे थे। लसूडिय़ा परिहार में स्थित राम मंदिर में दीपावली के दूसरे दिन सांपों की अदालत लगाई गई। इस अदालत में पिछले एक साल में लोगों को विभिन्न कारणों सांप के काटने के कारण को जानने के लिए आयोजन किया जाता है।दीपावली के दूसरे दिन आज सांप के काटे करीब पांच दर्जन लोग पहुंच रहे है।
हनुमानजी की मडिय़ा के सामने लगी सांपों की पेशी के दौरान हजारों लोग यह जानने पहुंचे थे कि आखिर उन्हें सांप ने क्यों काटा। कारण जानने के लिए कांडी की धुन पर भरनी गाकर इन्हे पेशी पर बुलाया गया। इस दौरान पेशी पर पहुंचे सांपों ने शरीर में आकर काटने का कारण बताया गया। ग्राम के नन्दगिरी महाराज की माने तो यहां होने वाली सांपों की पेशी हमारी तीन पीड़ी करती आ रही है।
दीपावली के दूसरे दिन प्रदेश भर से सांप के काटने से पीडि़त लोग यहां आते है व काटने का कारण जानते हैं। कारण जानने के साथ ही दोबारा एसी घटना न हो जिसके लिए सांपों से वचन भी लिया जाता है।
सांप की आत्मा ने कहा तेरे खेत में शांति से रहता था, तूने तो मेरा ही घर तोड़ दिया तेरे खेत में शांति से रहता था। तूने तो मेरा ही घर तोड़ दिया इसी की सजा मैंने तुझे दी थी। मैं तो तुम्हारे परिवार का हर जगह साथ दिया था और तुमने मुझे अपने से दूर क्यों कर दिया। कुछ इस तरह के सवाल पेशी के दौरान मानव के शरीर में सांपों की आत्मा ने आकर बताए। सांपों के पेशी में आने का कार्यक्रम सुबह से शुरू होकर शाम तक चलाता है।
कांडी और भरनी की धुन पर लहराने लगने हैं लोग
पिछले एक साल में सांप के काटने से पीडि़त लोग अपनी परेशानी लेकर मंदिर पहुंचते है। जहां काटे जाने का कारण जानने के लिए ढोल मंजिरों और मटकी की धुन पर कांडी व भरनी गाई जाती है। जिसके कारण पीडि़त व्यक्ति सांप की तरह लहराने लगता है। जहां पेशी पर बुलाए गए सांप काटे जाने का कारण बताते है। ग्रामीण सुरेश त्यागी ने बताया की कांड़ी, भरनी और विशेष मंत्र के साथ दोबारा पीडि़त को न काटे इसका संकल्प लिया जाता है।
चार पीड़ी से हो रही पेशी

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