August 3, 2026

भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में किया गया भव्य राधा नाम कीर्तन राधा का नाम प्यारा जीवन का है सहारा आदि भजनों की दी प्रस्तुति

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सीहोर। विठ्लेश सेवा समिति के तत्वावधान में हर माह राधा नाम मासिक कीर्तन का आयोजन देर रात्रि को शहर के पल्टन एरिया स्थित चौरसिया परिवार के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान की आरती के साथ किया गया और समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।
इस मौके पर भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा ने राधा के शानदार कीर्तन और भजनों की प्रस्तुतियां दी। राधा का नाम प्यारा जीवन का है सहारा, भव से पार होने का सब से बड़ा किनारा, पापो को ढोते ढोते जीवन चला हमारा, दुनिया में ढूंढा फिर भी मिलता नहीं किनारा, सुन कर के नाम राधा मिलता गया नजारा धारा तो बह रही श्री राधा नाम की, किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए। राधे राधे रटो, चले आएंगे बिहारी, जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए और हमे राधा रानी तेरे नाम का सहारा, नाम का सहारा तेरे नाम का सहारा आदि अनेक भजन सुनाए। भागवत भूषण पंडित मिश्रा के मार्गदर्शन में श्री राधा नाम कीर्तन दिव्य आयोजन रात्रि 7 बजे से देर रात्रि को कीर्तन के बाद महाप्रसादी का वितरण भी किया गया। इस मौके पर समाजसेवी मनोहर चौरसिया, मनोज चौरसिया और पियुष चौरसिया परिवार ने यहां पर आए सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि यह सांतवे वर्ष का दूसरा मासिक राधा नाम कीर्तन है और चौरसिया परिवार के द्वारा शहर के मध्य स्थित पल्टन एरिया भगवान गणेश के दरबार में आयोजित किया गया है। पहले भगवान की पूजा अर्चना की गई, इसके बाद राधा नाम का कीर्तन पाठ, राधा नाम का जाप, मौन माला और नृत्य माला आदि का आयोजन किया गया।
इस मौके पर भागवत भूषण पंडित श्री मिश्रा ने किया कि राधा नाम के श्रवण, स्मरण और उच्चारण से कर्मभोग, गर्भवास और भवबंधनादि एक ही साथ नष्ट हो जाते हैं। रा शब्द के उच्चारण से भक्त परम दुर्लभ मुक्ति पद को प्राप्त करता है और धा शब्द केउच्चारण से श्री हरि के धाम में दौड़कर पहुंचना है। रा का एक अर्थ पाना और धा का अर्थ है निर्वाण। राधा का अर्थ मुक्ति पाना है। गिरीराज सरन ने कहा कि इस नाम का जाप करने वाले का श्री हरि स्वयं सत्कार करते हैं। उन्होंने कहा कि मासिक राधा नाम कीर्तन में जो प्रसादी का वितरण किया जाता है वह अन्नकूट के प्रसाद की तरह होती है।

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