सम्राट मिहिर भोज की जयंती पूर्ण उत्साह के साथ मनाई गई
सीहोर। प्रतिवर्ष अनुसार गुर्जर समाज के तत्वाधान में मंगलवार को गुर्जर सम्राट मिहिर भोज का जन्मोत्सव आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके गुर्जर समाज और क्षेत्रवासियों ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा निकालकर ग्राम बामनपुरा पहुंचे यहां पर आस्था के साथ पूजा अर्चना के बाद प्रसादी का वितरण किया।
इस संबंध में जानकारी देते हुए गुर्जर समाज के खुमान सिंह गुर्जर ने बताया कि पिछले दो सालों से कोरोना महामारी के कारण कोई भव्य आयोजन सम्राट मिहिर भोज के जन्मोत्सव पर नहीं किया गया था, लेकिन मंगलवार को उत्साह के साथ जयंती मनाई गई और भव्य पैदल यात्रा निकाली गई। इस मौके पर ग्राम महुआखेड़ा से पैदल यात्रा का शुभारंभ किया गया था, गवा चांदबढ़ होते हुए ग्राम बामनपुरा पहुंची यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासियों ने पहुंचकर पैदल यात्रा की शोभा बढ़ाई।
उन्होंने बताया कि गुर्जर सम्राट मिहिर ने 49 वर्ष शासन किया। उनका राज्य कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र तक फैला था तथा वह गुर्जर प्रतिहार वंश के सबसे प्रतापी राजा थे। गुर्जर प्रतिहार वंश ने 300 वर्षों तक विदेशी आक्रमणकारियों को भारत में घुसने नहीं दिया। यही नहीं सम्राट मिहिर भोज ने बटेश्वर, मुरैना के अलावा मध्य प्रदेश में 200 मंदिरों का निर्माण कराया जोकि आज भी मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि मिहिर भोज का जन्म 873 में हुआ था तथा उनके पिता रामभद्र व माता का नाम अप्पा देवी था। सम्राट मिहिर भोज की 36 लाख की सेना में 36 बिरादरी के लोग शामिल थे तथा शासन बेहद न्याय प्रिय था। आज उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही युवा अपना भविष्य संवार सकते है। सम्राट मिहिर के रहते देश की सीमाएं सुरक्षित थी। सम्राट मिहिर जैसे राजाओं के कारण ही आज देश खुली हवा में सांस ले रहा है। युवाओं से सामाजिक बुराईयों व नशाखोरी से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने महान त्याग की पराकाष्ठा को पार किया। आप लोगों को गर्व करना चाहिए कि आप उस वंश से हैं। इस पर केवल गुर्जरों को नहीं बल्कि पूरे समाज को गर्व करना चाहिए।

