कल किया जाएगा गोवर्धन पूजन का विस्तार से वर्णन और लगाया जाएगा छप्पन भोग। भागवत कथा चौथा दिन-नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की से गूंज उठा पूरा पंडाल, कथा श्रवण करने वालो का उमड़ा सैलाब
सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी लगातार 24 वें वर्ष शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला भवन में महिला मंडल के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा की रसधारा बह रही है। भक्तों की विशाल संख्या इस माहौल को धर्मामय बना रही है। शहर सहित आस-पास के श्रद्धालु हर रोज यहां पर कथा सुनने के लिए और भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा के दर्शन करने के लिए आ रहे है। भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। जैसे ही वासुदेव भगवान कृष्ण को एक टोकरी में लेकर आए पूरे पांडाल में नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की से गूंज उठा सभी ने भगवान के जन्म पर एक दूसरे को बधाइयां दी ढोल नगाड़ों के साथ पुष्प वर्षा की ओर उसके बाद माखन मिश्री का वितरण किया गया और हल्दी लगाई गई।
बुधवार को कथा के चौथे दिन भागवत भूषण पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि भगवान हमेशा अंधकार को दूर करने के लिए आते है, जब भी अधर्म बढ़ता है। उस दौरान किसी भी रूप में अवतार लेते है, भगवान श्री कृष्ण का जन्म कथा करते हुए कहा कि जीव जब साधना करने बैठ जाता है तब संसार रूपी हथकड़ियां और पैरों की बेडिय़ां टूट जाती हैं और ईश्वर के प्रेम के दरवाजे खुल जाते हैं। भगवान कभी जन्म नहीं लेते अवतार धारण करते हैं, प्रगट होते हैं। उन्होंने देवकी-वासुदेव प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। भक्तों का उद्धार करने के लिए भगवान को जेल में प्रगट होना पड़ा। कथा के दौरान भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की जीवंत झांकी सजाकर जन्मोत्सव मनाया गया। जन्मोत्सव पर श्रोताओं ने जमकर नृत्य किया तथा मिठाई बांट कर खुशिंया मनाई व श्रीकृष्ण के जन्म पर बधाईयां व मिठाइयां आदि का भी वितरण किया। इस मौके पर उन्होंने भगवान श्री राम के जन्मोत्सव से लेकर भगवान की बाललीलाओं सहित अन्य का विस्तार से वर्णन किया।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि भगवान हमारे अहंकार को दूर करने और हमें सही मार्ग पर लाने का प्रयास करते है। दुनिया के सताए लोग यहां सीने से लगाए जाते है, भगवान शिव सभी की मनोकामनाएं दूर करते है। जब भी आप भगवान के पास जाऊ तो अपना दिल लेकर। भगवान का वास भक्त के हृदय में होता है। परमात्मा अविनाशी है जिनका कभी विनाश नहीं होता। सृष्टि का संचालन परमात्मा की कृपा से होता है। सत्य स्वरूप परमात्मा का वंदन करें। परमात्मा एक रूप में हैं। जब इच्छा होती है लीला के लिए अनेक रूप धारण कर लेते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी अधर्म के नाश के लिए हुआ था। इस मौके पर उन्होंने भगवान शिव के वैश्यानाथ कथा का वर्णन किया। प्रसन्न होकर शिव ने उसे उसके पापों का मोचन करके उसे अपना लोक प्रदान किया। शिव का वह अवतार वैश्यानाथ नाम से विख्यात है

कल लगाया जाएगा छप्पन भोग
इस संबंध में जानकारी देते हुए अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने बताया कि बुधवार को आस्था और उत्साह के साथ भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण अवतार मनाया गया। इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाई गई थी, वहीं गुरुवार को कथा के पांचवें दिवस गोवर्धन पूजन का वर्णन और छप्पन भोग लगाया जाएगा।
