भूतड़ी अमावस्या पर उमड़ा जन सैलाव। लगा भूतों का मेला
रेहटी। जीं हाँ आप सही सुना मेले तो आप ने बहुत देखे होंगे लेकिन आज आप को दिखा रहे हे भूतों का मेला रेहटी तहसील स्थित प्रसिद्ध नर्मदा घाट आवलीघाट इस तट (घाट) अपना अलग महत्व है नर्मदा पुराण में यहाँ का विशेष उल्लेख है। हर वर्ष नवरात्रि से एक दिन पहले आने बाली अमावस्या को (पितृमोक्ष )भूतड़ी अमावस्या कहा जाता है जिस पर यहाँ दूर दूर से लोग एक दिन पहले ही अ जाते है। इसी एक रात पहले भूतों का मेला लगता है जिन के ऊपर बाहरी बाधा भूत पालित के शिकार हे उनका उपचार रात भर किया जाता है यहाँ इलाज जिसके शरीर में देवी देवता आते (पांडा )वह करते है। सुबह स्नान के बाद भूत पालितो को मुक्ति मिलती है। लोग अपने अपने पांडा के साथ इकट्ठा हो कर पहुँचते है अपनी समस्या भूत पालित को दूर कराते है। यह स्नान के बाद वस्त्र भी यही छोड़ने की धारणा है यहाँ वर्षों से चला अ रहा है
भूतड़ी अमावस्या का ये है महत्व
भूतड़ी अमावस्या विशेष रूप से अतृप्त आत्माओं की तृप्ति के लिए होती है। आज के दिन श्रद्धालु नदी में स्नान के बाद दान करते हैं। माना जाता है कि पितरों के निमित्त तर्पण करने से भी सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भूतड़ी अमावस्या प्रेत बाधाओं को दूर करने के लिए भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
84 लाख में से एक योनि प्रेत की भी



शास्त्रों के अनुसार 84 लाख योनि में एक प्रेत योनि होती है, जिसकी अकाल मौत होती है या जिसने जीवनभर पाप किए हों, उसे प्रेत योनि मिलती है। इनकी उम्र 60 से 200 साल तक के बीच होती है। वे बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार भूतों का निवास अंधकार में माना गया है। उनका मानव जीवन में दखल नहीं के समान है। फिर भी कभी कोई भूत के रास्ते में आता है, तो वह इंसान हिल जाता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा नहीं होता।
सभी लोग यहाँ से सालकनपुर विजासन देवी के दर्शन को पहुँचते है