51 हजार श्री सूक्त के पाठ के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चनापांच दिवसीय महा लक्ष्मी अनुष्ठान 16 हजार से अधिक वस्तुओं से की जाएगी सहस्त्रार्चन
सीहोर। शहर के भोपाल नाका स्थित कार्य मंगलम में श्री शक्ति सेवा संस्थान के तत्वाधान में पांच दिवसीय स्फटिक श्री यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा, महालक्ष्मी अनुष्ठान और विशेष यज्ञ त्रिअनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रविवार को यहां पर मौजूद श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में मौजूद ब्राह्मणजनों ने सुबह फलों के सर से देवी मां का अभिषेक करने के साथ 1000 हजार मोती, मूंगा, लोंग और इलाईची से सहास्त्रार्चन किया और उसके बाद महा आरती का आयोजन किया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए ज्योतिषार्चय अनिल सोनी ने बताया कि सोमवार को दिवाली के पावन अवसर पर सुबह श्रीयंत्र का पूजन आदि के साथ 1000 कमल गट्टे से से सहस्त्रार्चन की जाएगी।
इस मौके पर यज्ञाचार्य पंडित पियुष शर्मा ने बताया कि माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कुबेर, जिसे धन का अधिपति माना जाता है, की पूजन-अर्चना करके कुबेर मंत्र का जाप करें, आर्थिक जीवन खुशियों से भर जाएगा। ऋग्वेद में माता लक्ष्मी की उपासना हेतु श्री सूक्त के मंगलकारी मंत्रों का उल्लेख है। श्रीसूक्त पाठ का बहुत महत्व है। श्रीसूक्त मंत्र का पाठ करने के पश्चात हवन करें, हवन करते हुए भी इसी मंत्र का जाप करें। श्रीसूक्त पाठ से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और गरीबी एवं कंगाली दूर कर सुख व समृद्धि प्रदान करती हैं। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त पाठ करना शुभ माना गया है। हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी को धन, समृद्धि, आनंद और वैभव की देवी माना जाता हैं। श्री सूक्त का पाठ करने से महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसे मां लक्ष्मी की अराधना करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। श्री यंत्र के सामने श्री सूक्त का पाठ किया जाता है। इस मंत्र में श्री सूक्त के पंद्रह छंदों में अक्षर, शब्दांश और शब्दों के उच्चारण से अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी के ध्वनि शरीर का निर्माण किया जाता है। श्रीसूक्त ऋग्वेद के पांचवें मण्डल के अन्त में होता है। सुक्त में मंत्रों की संख्या पन्द्रह है। सोलहवें मंत्र में फलश्रुति है। उन्होंने बताया कि हर दिन यहां पर कन्याओं और गौ माता पूजन के अलावा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जा रही है।
