गुरुवार को मनाया जाएगा यम द्वितीया का पर्व की जाएगी कलम की पूजा अर्चना
सीहोर। दीपोत्सव के तहत भाई दूज पर्व 27 को मनाया जाएगा। कायस्थ समाज के लोग इस दिन यम द्वितीया पर्व मनाएंगे। शहर के शुगर फैक्ट्री स्थित चित्रगुप्त मंदिर में भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना होगी, साथ ही मंदिरों में हवन, पूजन के साथ कलम दवात की पूजा की जाएगी। इस संबंध में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के अध्यक्ष प्रदीप कुमार सक्सेना ने बताया कि आयोजन के लिए कार्यक्रम का प्रभारी अध्यक्ष अभिनीश श्रीवास्तव को मनोनित किया गया है।
उन्होंने बताया कि आगामी 27 अक्टूबर गुरुवार को शहर के शुगर फैक्ट्री स्थित भगवान चित्रगुप्त मंदिर परिसर में सुबह भगवान का अभिषेक किया जाएगा और उसके पश्चात देर शाम को सामूहिक रूप से महा आरती की जाएगी। कायस्थ महासभा के अध्यक्ष श्री सक्सेना ने बताया कि भाई दूज के दिन ही चित्रगुप्त की पूजा भी जाती है। दिवाली के बाद भाई-दूज के पर्व को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसे कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मृत्यु के देवता भगवान यम के सहयोगी चित्रगुप्त को सभी मनुष्यों के कर्मों के रिकॉर्ड रक्षक के रूप में जाना जाता है। भगवान चित्रगुप्त मनुष्यों के सभी पापों और पुण्य का रिकॉर्ड रखते हैं और उसी मुताबिक मृत्यु के बाद उनको गति प्राप्त होती है। इसलिए माना जाता है कि इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने से कारोबार में तरक्की होती है और धन वृद्धि होती है। चित्रगुप्त लेखा-जोखा रखने का कार्य करते हैं। इसलिए इनका मुख्य कार्य लेखनी से जोड़कर देखा जाता है, यही कारण है कि चित्रगुप्त जी के प्रतिरूप के तौर पर कलम या लेखनी का पूजन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चित्रगुप्त जी का पूजन करने से बुद्धि, वाणी और लेखनी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए यह दिन विशेष होता है क्योंकि इस दिन नए बहीखातों पर श्री लिखकर कार्य आरंभ किया जाता है। इसके अतिरिक्त सभी आय-व्यय का ब्योरा चित्रगुप्त जी के सामने रखा जाता है। कायस्थ समाज में चित्रगुप्त को आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है। इस दिन लोग चित्रगुप्त जयंती के रूप में मनाते हैं व लेखनी-दवात का पूजन करते हैं। यही वजह है कि इसे दवात पूजन के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में सुबह अभिषेक के बाद शाम चार बजे हवन और उसके पश्चात महा आरती की जाएगी।

