August 3, 2026

-श्री शक्ति सेवा संस्थान ने किया स्फटिक श्री यंत्र और सिक्कों का वितरण

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सीहोर। हर साल की तरह इस बार भी शहर के भोपाल नाका स्थित कार्य मंगलम में श्री शक्ति सेवा संस्थान के तत्वाधान में स्फटिक श्री यंत्र प्राण प्रतिष्ठा, महालक्ष्मी अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया किया गया, इस मौके पर ज्योतिषाचार्य अनिल सोनी के विशेष मार्गदर्शन में यज्ञ आचार्य पंडित पीयूष शर्मा सहित बड़ी संख्या में वेद-पाठी ब्राह्मणों के द्वारा स्फटिक श्री यंत्र, दक्षिणावर्ती शंख, मोती, मूंगा, चांदी के सिक्के, गोमती चक्र, पीली कौडी, कुमकुम, कमल गट्टे, स्फटिक की माला आदि से मां लक्ष्मी की सहस्त्रार्चन अभिषेक के बाद संस्थान के द्वारा इन अभिमंत्रित सामग्री का वितरण किया जा रहा है।
शहर में संस्थान के द्वारा ज्योतिषाचार्य श्री अनिल सोनी के द्वारा भव्य आयोजन किया गया । उसमें पहले दिन 51 विप्रजनों के द्वारा श्री यंत्र आवरण पूजन के उपरांत पंचामृत से देवी मां का पंचामृत किया गया। वहीं कुमकुम, हल्दी गठान और अक्षत से सहस्त्रार्चन किया गया, इस संबंध में जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य अनिल सोनी ने बताया कि यह लगातार दूसरी साल यह महालक्ष्मी अनुष्ठान किया गया है। अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन कन्या पूजन, गौ माता पूजन, ब्राह्मण पूजन तथा हवन पूजन का आयोजन किया गया था। उन्होंने बताया कि अतिथि के रूप में पंडित मोहितराम पाठक, पंडित पवन व्यास और पंडित हरीश तिवारी आदि अनेक लोगो ने भी पहुंचकर आरती की एवम आयोजन में भागीदारी की।
अनुष्ठान में प्रतिदिन 21 सौ आहूतियां दी गई
लगातार पांच दिनों तक चले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन 21 सौ आहूतियां दी गई। इसके अलावा मंच बनाकर द्वादश विनायक, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका, वास्तु मंडल, क्षेत्रपाल, सर्वतोभद्र मंडल, नवग्रह मंडल, असंख्यात मंडल, अष्टदल मंडल, गौरी तिलक, वरुण मंडल, श्री यंत्र मंडल आदि का निर्माण किया गया था। उन्होंने बताया कि वैदिक देवताओं में लक्ष्मी का स्थान सबसे सर्वोच्च है जो की धन और वैभव प्रदान करने वाली देवी हैं। भगवत पुराण के मुताबिक लक्ष्मी जी की उत्पत्ति दूध सागर से हुई है। माता लक्ष्मी ही सीता के रूप में प्रकट हुई हैं। संस्कृत के शब्द लक्ष्य से अभिप्राय है उद्देश्य, जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक सम्पन्नता का मूल उद्देश्य लक्ष्मी माता ही पूर्ण करती हैं। इस ब्रह्माण्ड के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विष्णु जी के मूल अवतार रूपी हैं श्री लक्ष्मी जी। व्यक्ति के जीवन में समृधि और सम्पन्नता को देने वाली माता लक्ष्मी जी ही हैं। धन सम्पन्नता के अतिरिक्त लक्ष्मी माता की आशीर्वाद से व्यक्ति की जीवन में आपसी सबंधों में सुधार, सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा भी लक्ष्मी जी के आशीर्वाद से ही प्राप्त होती हैं। उक्त पांच दिवसीय अनुष्ठान में वेद-पाठी विप्रजनों के द्वारा 16 हजार वस्तु़ओं का विधिवत सहस्त्रार्चन किया गया।

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