सभी देवता देते है पल्ला झाड़ के मेरे भोले बाबा देते है छप्पर फाड़कर-भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा
कथा स्थल सहित अन्य पंडाल पड़े छोटे, समिति द्वारा अब डेढ़ लाख स्कावयर फीट में ओर लगाए जाऐंगे भव्य पंडाल
पानी के लिए चलाए जा रहे 150 से अधिक पेयजल टैंकर, 600 से अधिक शौचालय
आधा दर्जन से अधिक एंबुलेंस, तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के अलावा 35 से अधिक मेडीकल स्टाफ कर रहा श्रद्धालुओं की सेवा
तीन दर्जन एलईडी के बाद एक एक दर्जन एलईडी बढ़ाई, परिसर में बढ़ाए सांउड सिस्टम
महाशिवरात्रि पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, 10 टन से अधिक फलहारी प्रसादी का 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे कथा स्थल पर
सीहोर। सभी देवता देते भैया पल्ला झाड़ कर मेरे भोले बाबा देते भैया छप्पर फाड़कर। भगवान महादेव पर विश्वास और आस्था होना चाहिए, तब ही सत्य के मार्ग पर आप अग्रसर हो सकते है। अपने कर्म के प्रति जिस दिन तुम जागरूक हो जाओगे, उस दिन तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य की प्राप्ति निश्चित है। कर्म का फल जरूर मिलता है। श्री शिवपुराण में भी लिखा है कि स्वयं कर्म करोगे तो दुख घटना शुरू हो जाएगा। कर्म की लिस्ट हम स्वयं तैयार करते है। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वरधाम पर जारी सात दिवसीय शिव महापुराण के तीसरे दिन भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि जिस कार्य को आप पूरी निष्इा और सत्य के साथ करेंगे उसमें आपको सफलता मिलेगी। शनिवार को कथा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती के मंगल विवाह की झांकी सजाई गई थी और सुबह से देर रात्रि तक जारी भोजनशाला में 10 टन से अधिक फलहारी प्रसादी का वितरण लाखों श्रद्धालुओं को किया गया। महाशिवरात्रि का पावन पर्व शनिवार को आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में आज लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं को फलहार की प्रसादी वितरित किया गया। इसके अलावा यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं महादेव का जलाभिषेक के साथ-साथ पूजा-अर्चना कर रहे है। सुबह से ही श्रद्धालु देवादिदेव महादेव को बेलपत्र, शमी पत्र, अकाओं, धतुरा, बेर अर्पित कर रहे है। भागवत भूषण पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि हमारे द्वारा किए गए अच्छे कर्मों के बाद यदि मन मे अहंकार का भाव आ गया तो उसका पुण्य लाभ हमें नहीं मिलता। यदि हम भगवान शिव का व्रत रखकर अभिमान करते हैं तो उस व्रत का वांछित फल हमें नहीं मिलता है।
भिक्षुवर्य अवतार कथा का वर्णन: शनिवार को शिवमहापुराण के दौरान पंडित श्री मिश्रा के द्वारा भगवान शंकर के 14 वें अवतार के बारे में वर्णन किया। यह कथा विदर्भ नरेश सत्यरथ,उनकी पत्नी और उनके पुत्र के बारे में है महाभारत के बाद सभी देवता अपने-अपने धाम चले गए। पृथ्वी लोक पर कलयुग का प्रारंभ हो चूका था। कलयुग के प्रारंभ होने के बाद देवता बस विग्रह रूप में ही रह गए। अब कलयुग होने की वजह से धर्म और अधर्म के मध्य ज्यादा भेद नही था। अब सारे लोग धन संपती की लालच में एक दूसरे के राज्य पर हमले कर रहे थे और उनकी संपत्ति छीन रहे थे। विदर्भ के राजा सत्यरथ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। शत्रु राज्य ने उनके राज्य पर हमला कर दिया और राजा सत्यरथ को मार डाला। उसकी गर्भवती पत्नी ने शत्रुओं से छिपकर अपने प्राण बचाए आदि का विस्तार से वर्णन किया।
पेट भरने की जिम्मेदारी भगवान की पेटी भरने की नहीं
इन श्रद्धालुओं को शिव पुराण कथा का मर्म और आज के हालात पर मार्गदर्शन देते हुए पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि व्यक्ति का पेट भरने की जिम्मेदारी परमात्मा की होती है लेकिन पेटी भरने की जिम्मेदारी परमात्मा की नहीं होती है। भगवान ने पेट देकर भेजा है इसलिए उसे भरना उसकी जिम्मेदारी है। परिवार दिया है इसलिए उसका पालन पोषण करना भी उसकी जिम्मेदारी है। रिश्ते नाते दिए हैं तो उनका निर्वहन करना भी उसकी जिम्मेदारी है। भगवान ने पेटी नहीं दी थी तो उसे भरना भगवान की जिम्मेदारी नहीं है। व्यक्ति जब पेटी को भरने के चक्कर में लगता है तो वह पेट को भूल जाता है और पेटी को भरते-भरते शरीर व्यर्थ हो जाता है।
पूरे साल श्रद्धालुओं को कुबेरेश्वरधाम से
विठलेस सेवा समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि अब रुद्राक्ष का वितरण पूरे साल जो कुबेरेश्वर धाम आते हैं, उन्हें दिया जाए। जो भक्त नहीं आ सकते, वे साल में कभी भी आकर यहां से रुद्राक्ष ले सकते हैं। लोग समझ रहे हैं यह रुद्राक्ष की भीड़ है, यह तो बाबा के भक्तों की भीड़ है। यहां पर आने वाले श्रद्धालु पूरी आस्था और उत्साह के साथ महोत्सव में शामिल हो रहे है। समिति के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं में विस्तार किया जा रहा है। जिससे आने वाले श्रद्धालुओं को कोई भी असुविधा नहीं होगी। रविवार को कथा के दौरान भगवान गणेश आदि का प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

