हमें जीवन में जो कुछ मिला है वह हमारे कर्मों से मिला है, आगे भी जो कुछ मिलेगा वह अपने कर्मों से ही मिलेगा-भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा


बड़ा बाजार और खजांची लाइन सहित अन्य स्थानों पर कथा के कारण चल रहे भंडारे
आज भागवत कथा के अंतिम दिन सादगी के साथ निकाली जाएगी शोभा यात्रा
सीहोर। हमें जीवन में जो कुछ मिला है वह हमारे कर्मों से मिला है। आगे भी जो कुछ मिलेगा वह अपने कर्मों से ही मिलेगा। व्यक्ति का पूरा जीवन यह जानने में लग जाता है कि उसका जन्म क्यों हुआ? हकीकत यह है कि हमारा जन्म अपने पूर्व जन्म के प्रतिफल को पाने और भगवान का भजन करने के लिए हुआ है। यदि हमने पूर्व जन्म में अच्छे कर्म किए होंगे तो इस जन्म में प्रतिफल के रूप में हमें आनंद की प्राप्ति होगी। कथा से महिलाओं में यह भाव आ गया है कि अपन भगवान के और भगवान अपने हैं। तभी इस कथा की सार्थकता है। कथा के छठवे दिन भागवत भूषण पंडित श्री मिश्रा ने रुकमणी विवाह, गोवर्धन पूजन का महत्व के अलावा श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण के जन्म स्थल की मानसिक रूप से यात्रा कराई।
शहर के बड़ा बाजार में जारी सात दिवसीय भागवत कथा अग्रवाल महिला मंडल के तत्वाधान में कराई जा रही है। कथा का श्रवण करने के लिए शहर के सभी महिला मंडलों के अलावा भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आ रहे है। शहर के खजांची लाइन और बड़ा बाजार में धार्मिक संगठनों के द्वारा भोजन प्रसादी की व्यवस्था की जा रही है। गुरुवार को भी हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं को स्टाल लगाकर भोजन प्रसादी का वितरण किया गया। इसके अलावा केले की प्रसादी प्रदान की गई।
भगवान को लोग माखन चोर कहते है, वह मात्र एक लीला
भगवान को लोग माखन चोर कहते है, वह मात्र एक लीला है। कोई बेटा अपने घर के फ्रीज से माखन चोरी करे तो वह चोर नहीं होता, भगवान का निवास तो पूरा संसार है, भगवान ने अपनी सभी लीलाओं में अपनेपन का परिचय दिया है। कृष्ण से श्रेष्ठ गुरु खोजना कठिन है। इससे भी अधिक उनके जैसा महामानव खोजना संभव नहीं है। जिसके जीवन का हर पृष्ठ पूर्ण हो, जीवन जीने की कला जिससे सीखी जा सकती हो और जिससे हम सीखते हैं, वह गुरु होता है। पिता ने जेल से लाकर यशोदा की झोली में डाल दिया। बचपन गोकुल की गलियों में बीता। बचपन की हर घटना में उसका एक संदेश छिपा है।
माता रुकमणी के विवाह की झांकी सजाई
गुरुवार को कथा में अग्रवाल महिला मंडल के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण और माता रुकमणी की सुंदर झांकी सजाई गई थी, इस मौके पर भागवत भूषण पंडित श्री मिश्रा ने भगवान के विवाह का वर्णन किया। जब हमारे सत्कर्मों का अभिमान नष्ट हो जाता है। जब धरती पर अधर्म बढ़ा है। तब भगवान ने अवतार लेकर अपने भक्तों को तारा है। कथा सुनने से पापों का नाश होता है। कथा भगवान के स्वरूप का ज्ञान कराती है। कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के कई प्रयास में असफल होने के बाद अक्रूरजी को मथुरा में मेला उत्सव के बहाने कृष्ण और बलराम को लेने भेजा। गोकुलवासियों के मना करने के बाद भगवान कृष्ण उन्हें समझाकर मथुरा पहुंचते हैं। कंस दोनों भाईयों को मारने की योजना बनाकर मदमस्त हाथी छोड़ देता है। भगवान उसका वध कर देते हैं। रुक्मणी विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया। जहां भगवान कृष्ण शत्रुओं को पराजित कर रुक्मणी से विवाह करते हैं। उसके बाद कृष्ण रुक्मणी की सुंदर झांकी सजाई।
आज कथा का विश्राम, निकाली जाएगी सादगी के साथ यात्रा
इस संबंध में जानकारी देते हुए अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार को कथा का विश्राम किया जाएगा। इस मौके पर कथा दोपहर दो बजे से शाम साढ़े चार बजे तक होगी और उसके पश्चात सादगी के साथ यात्रा निकाली जाएगी, उन्होंने चरखा लाइन, बड़ा बाजार और खंजाची लाइन के क्षेत्रवासियों से अपने-अपने घरों से पुष्प वर्षा कर यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के स्वागत की अपील की है।