August 3, 2026

50 से अधिक सागौन कटाई और जमीन कब्जा मामला
एक सप्ताह बाद भी कार्रवाई शून्य, विभागों की चुप्पी से ग्रामीणों में आक्रोश तेज

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बुधनी/सीहोर
मुकेश मेहता
9425342666

ग्राम बायां में 50 से अधिक सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई और किसानों की भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी भी जिम्मेदार विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

पीड़ित किसानों द्वारा थाना, वन विभाग और राजस्व विभाग को लिखित शिकायत दिए जाने के बावजूद न तो मौके का विधिवत पंचनामा किया गया और न ही अवैध कटाई व कब्जे के आरोपों की जांच शुरू हुई है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

खेतों पर सन्नाटा, जिम्मेदारों पर खामोशी

ग्रामीणों का कहना है कि जिन खेतों में वर्षों से सागौन के सैकड़ों वृक्ष खड़े थे, वहां अब समतलीकरण कर तार फेंसिंग कर दी गई है। कटे हुए सागौन के ठूंठ अब भी जमीन पर मौजूद हैं, जो कथित अवैध कटाई की गवाही दे रहे हैं। इसके बावजूद वन अमले द्वारा अब तक न तो लकड़ी जब्त की गई और न ही किसी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।

आठ किसानों की लगभग विभिन्न खसरों की भूमि इस विवाद की जद में बताई जा रही है। किसानों का आरोप है कि बाहरी व्यक्ति द्वारा पहले सीमांकन कराए बिना ही आसपास की निजी और राजस्व भूमि को अपने कब्जे में लेकर पेड़ों की कटाई की गई।

आवेदन के बाद भी जांच शुरू नहीं

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आवेदन दिए आठ दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन न तो राजस्व निरीक्षक द्वारा सीमांकन किया गया और न ही वन विभाग द्वारा नुकसान का आकलन किया गया है। थाना स्तर पर भी कोई अपराध पंजीबद्ध नहीं किया गया है।

जब संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इससे ग्रामीणों में यह संदेश जा रहा है कि मामला दबाने की कोशिश की जा रही है।

आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई और भूमि का सीमांकन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो वे तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

मामले ने एक बार फिर वन संरक्षण, राजस्व भूमि की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग कब तक कार्रवाई करते हैं या ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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