August 3, 2026

होली पर सजी रंगीन बाजार, लेकिन ग्राहकों का इंतजार — किसानों के क्षेत्र में सुस्त पड़ी त्योहारी रौनक

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बुधनी/रेहटी।
मुकेश मेहता
रंगों के पर्व होली को लेकर नगर और आसपास के क्षेत्रों के बाजार पूरी तरह सज-धज कर तैयार हैं। मुख्य बाजार, चौक-चौराहों और गली-मोहल्लों में अस्थायी दुकानें सज गई हैं। हर तरफ रंग-बिरंगे गुलाल की ढेरियां, आकर्षक पैकिंग में अबीर, बच्चों के लिए कार्टून और टैंक वाली पिचकारियां, बड़े आकार की प्रेशर पिचकारियां, रंगीन गुब्बारे, मुखौटे, टोपी और होली स्पेशल टी-शर्ट्स नजर आ रही हैं।

बाजार का दृश्य पूरी तरह से होलीमय हो चुका है, लेकिन इस रंगीन माहौल के बीच ग्राहकों की कमी साफ दिखाई दे रही है। दुकानदार दिनभर दुकान पर बैठे ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं।

आज रात होलिका दहन किया जाएगा और 4 मार्च को रंगों का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ऐसे में ग्राहकी के लिए अब केवल एक दिन शेष बचा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर कल बाजार में भीड़ नहीं उमड़ी, तो इस बार का त्योहार उनके लिए निराशाजनक साबित हो सकता है।




कृषि प्रधान क्षेत्र में नकदी संकट का असर

बुधनी-रेहटी क्षेत्र पूरी तरह कृषि पर आधारित है। वर्तमान में रबी की फसलें—गेहूं, चना और सरसों—अभी खेतों में खड़ी हैं। कटाई और मंडी में बिक्री में अभी समय बाकी है। ऐसे में किसानों के पास नगदी की कमी बनी हुई है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि हर साल फसल बिकने के बाद बाजार में अच्छी खासी रौनक रहती है, लेकिन इस बार फसल तैयार होने में देरी और भुगतान की प्रक्रिया लंबी होने के कारण बाजार पर सीधा असर पड़ा है। किसान अभी आवश्यक खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे त्योहार की खरीदारी सीमित रह गई है।




महंगाई और सीमित बजट का भी प्रभाव

व्यापारियों का मानना है कि महंगाई ने भी इस बार बाजार की रफ्तार को धीमा किया है। रंग, गुलाल और पिचकारियों के दामों में हल्की बढ़ोतरी हुई है। वहीं आमजन का बजट सीमित होने से लोग केवल जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं।

कई दुकानदारों ने बताया कि पिछले वर्षों में होलिका दहन से दो-तीन दिन पहले बाजार में पैर रखने की जगह नहीं होती थी। इस बार स्थिति इसके उलट है। ग्राहक आते तो हैं, लेकिन मोलभाव अधिक करते हैं और कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।




हर्बल रंगों की मांग, लेकिन बिक्री कम

इस बार बाजार में हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों की भी अच्छी व्यवस्था की गई है। पर्यावरण और त्वचा को ध्यान में रखते हुए कई दुकानदारों ने खासतौर पर प्राकृतिक गुलाल मंगाया है। बावजूद इसके बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रही है।

बच्चों के लिए नए डिजाइन की पिचकारियां, फॉग गन और बैटरी से चलने वाली पिचकारियां आकर्षण का केंद्र हैं, लेकिन खरीदारों की कमी से ये सामान दुकानों में ही सजे रह गए हैं।




अंतिम दिन पर टिकी व्यापारियों की उम्मीद

अब व्यापारियों की सारी उम्मीद अंतिम दिन पर टिकी हुई है। उनका कहना है कि होलिका दहन के बाद लोग पारंपरिक रूप से खरीदारी के लिए निकलते हैं। यदि कल बाजार में भीड़ बढ़ती है, तो कुछ हद तक नुकसान की भरपाई हो सकती है।

फिलहाल बाजार में रंग तो बिखरे पड़े हैं, लेकिन रौनक अधूरी है। दुकानों में सजे गुलाल ग्राहकों की राह देख रहे हैं और व्यापारी इस उम्मीद में हैं कि अंतिम समय में बाजार की तस्वीर बदलेगी और होली का रंग उनके कारोबार पर भी चढ़ेगा।

यदि अंतिम दिन भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इस बार की होली व्यापारियों के लिए फीकी साबित हो सकती है।

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