नेत्रहीन शिक्षक हरिओम जला रहे शिक्षा की अलख .150 से अधिक बच्चों को पढ़ाने के लिए 1 दिन पहले करते हैं तैयारी
नसरल्लागंज से सुनील कसेरा

नसरुल्लागंज.देशभर में पांच सितंबर को हर साल शिक्षक दिवस बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है. शिक्षकों के लिए इस खास दिन को इसलिए मनाते हैं क्योंकि इस ही दिन देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन होता है. ये दिन सभी शिक्षकों व गुरुओं के लिए खास होता है. इस दौरान देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.
ऐसे ही संघर्ष हीन एक शिक्षक की कहानी सुना रहे है मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के एक सरकारी स्कूल में नेत्रहीन शिक्षक बच्चों को शिक्षा की रोशनी दिखा रहे हैं. दरअसल, जिले के विकासखंड नसरुल्लागंज के ग्राम सिंहपुर प्रथामिक शासकीय स्कूल में दिव्यांग शिक्षक हरिओम जैमनी पदस्थ है वे आंखों से दिव्यांग जरूर हैं.लेकिन उनके इरादे हिमालय से भी ऊंचे हैं.
हरिओम जैमनी स्कूल में समाजिक विज्ञान गणित व अंग्रेजी खुद ही पढ़ाते हैं. पिछले चार साल से यहां पदस्थ हैं. हरिओम जैमनी जन्म से नेत्रहीन है. उन्हें बचपन से नही दिखाई देता था .लेकिन बचपन से पढ़ाई का बहुत शौक था और शिक्षक बनने का भी पढ़ाई करने के बाद उन्हें सभी किताबों का ज्ञान है.बच्चों को बिना ब्रेललिपि की मदद से पढ़ाते हैं. यहां के बच्चे हर साल पांचवीं बोर्ड में बच्चे 80-90% तक अंक लाते हैं. जैमनी की रुचि ने विद्यालय के वातावरण को उत्तम शिक्षा के अनुकूल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. बच्चों को स्कूल आने के बाद नियमित प्रार्थना, व्यायाम आदि के साथ पढ़ाई और फिर बागवानी की शिक्षा दी जा रही है. यह स्कूल किसी निजी विद्यालय के सामान सुंदर और आकर्षक नजर आता है. स्कूल में पदस्थ अतिथि शिक्षक महेश भी बताते कि हरिओम जैमनी सर बच्चों को हर विषय पढ़ाते हैं. बड़े ही आसानी से वह बच्चो को पढ़ा लेते हैं. मोबाइल भी चला लेते हैं जिला शिक्षा अधिकारी के जितने भी लेटर आते हैं और जो भी जन शिक्षा केंद्र से ग्रुप में जानकारी आती हैं उसको समझ भी लेते हैं और सुन भी लेते हैं.हरिओम
जैमनी शिक्षक ने बताया शुरुआत से ही घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. ऐसे में माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई ब्लाइंड स्कूल में की .जिसके बाद 12वीं तक की पढ़ाई एक एनजीओ की मदद से छात्रावास में रहते हुए भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय से की स्नातक तक पढ़ाई की है. शुरुआत से ही शिक्षक बनने का सपना था ऐसे में राजनीतिक विज्ञान से एम ए पास करने के बाद दिव्यांग कोटे के तहत शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कर और नौकरी हासिल की. शिक्षक हरिओम के अनुसार उनके स्कूल में पहली से आठवीं तक के करीब डेढ़ सौ से अधिक बच्चे हैं. वहीं माध्यमिक में 120 बच्चे हैं वह रोजाना 18 किलोमीटर दूर सफर बस से तय कर स्कूल पढ़ाने पहुंचते हैं .इसके लिए रोजाना एक ऑटो चालक उनकी बस से उतरने और पढ़ने में मदद करता है. घर में खुद ही बिना सहारा लिए काम भी करते हैं.हरिओम जैमिनी आज खुद अंधेरे में है पर स्कूली बच्चों के जीवन में भर रहे हैं उजाला इसी के तहत यह शिक्षक की अनोखी कहानी है


