वरिष्ठ पत्रकार सुरेश जैमिनी आज से निकले पैदल नर्मदा परिक्रमा को, 6 माह में होगी पूरी 3100 किलोमीटर चलेंगे पैदल
सीहोर – समाजसेवी व जिले के वरिष्ठ पत्रकार माँ नर्मदा के भक्त दादा सुरेश जैमिनी पिछले कई वर्षों से मॉ नर्मदा की आराधना को अपना ध्येय बनाये हुए हैं। वह नीलकंठ में नीलकंठेश्वर धाम आश्रम संचालित कर मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा करने वाले भक्तों की सेवा करते रहते हैं। आज तक 5 बार वाहनों से मॉ नर्मदा की परिक्रमा भी आप कर चुके हैं लेकिन इस साल उन्होने पूर्णिमा पर मॉ नर्मदा की पैदल परिक्रमा करने के संकल्प लेकर कई लोगों को हैरत में डाल दिया है। असल में यह यात्रा बहुत जंगल पहाड सहित उबड खाबड रास्तों से गुजरते हुए 3100 किलो मीटर लम्बी एंव कठिन यात्रा होती है। इसलिये ही सामान्यत: युवा एंव स्वबस्थ्य भक्त करीब 4 माह में पूर्ण कर लेते हैं । बैस जन सामान्य को इतना लम्बा पैदल चलना आसान नहीं, इसलिए आजकल भक्तगण सायकल ,मोटर सायकल बस से भी यात्रा करना प्रारंभ कर दिया है। परन्तु करीब 63 साल के दादा सुरेश जैमिनी अपनी यात्रा आज सोमवार को मॉ नर्मदा का आशीष लेकर करने जा रहे हैं। नर्मदा किनारे के छोटे से गांव सातदेव में जन्मे दादा जैमिनी को मॉ नर्मदा की भक्ति के संस्कार उनकी माता श्री से बाल्यकाल से ही मिले थे। 1987 में विवाह के बाद से धर्मपत्नि श्रीमति सुधा जैमिनी ने भी इस क्रम को आगे बढ़ाया और लगातार घर में प्रतिदिन मॉ नर्मदा की पूजा व विगत
36 वर्ष से निरन्तर प्रतिदिन दीप प्रज्वलित करती आ रहीं हैं ।
एक समय दादा जैमिनी के साथ बड़ी दुर्घटना हो गई थी, लगातार 16 माह तक बिस्तर पर रहते हुए ही मॉ नर्मदा की परिक्रमा का संकल्प लिया था। डाक्टरों का कहना था कभी चल नहीं पायेंगे लेकिन मॉ नर्वदा के आशीष से आज पूर्ण स्वस्थ्य हैं। यहां यह भी गौर तलव है कि श्री जैमिनी पिछले कई वर्षों से मां नर्मदा के संरक्षण की लड़ाई सोशल मीडिया एंव अखबारों के माध्यम से लगातार लड़ते चले आ रहे हैं। श्री जैमिनी ने बताया कि प्रारंभ में कुछ दिन 5-5 किलो मीटर, फिर 8 से 10 फिर धीरे-धीरे पदयात्रा करने की दूरी बढ़ती रहेगी। सच स्टोरी परिवार आपकी यात्रा की मंगल कामना करता है।

