तेंदूपत्ता संग्रहण दर अब 4000 रूपये प्रति मानक बोरा कर दी
सीहोर
तेन्दूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिये उन्हें संबल योजना में शामिल किया गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े जनजातीय परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के लिये तेंदूपत्ता संग्रहण दर 3000 रूपये प्रति मानक बोरा से बढ़ा कर 4000 रूपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है। वर्ष 2003 में संग्रहण दर 400 रूपये प्रति मानक बोरा थी। वन मंत्री श्री नागरसिंह चौहान ने इसके लिये सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिये हैं।
संग्रहण पारिश्रमिक के साथ-साथ तेन्दूपत्ता के व्यापार से प्राप्त शुद्ध लाभ भी संग्राहकों के साथ बांटा जाता है। यह लाभांश भी बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2003 में जहाँ शुद्ध लाभ का 50 प्रतिशत अंश संग्राहकों को बोनस के रूप में वितरित किया जाता था, अब 75 प्रतिशत भाग बोनस के रूप में संग्राहकों को वितरित किया जा रहा है। लघु वनोपज संग्रहण कार्य में ज्यादा जनजातीय समुदाय के लोग हैं। उनहें बिचौलियों के शोषण से बचाने और उनकी संग्रहित लघु वनोपज का लाभ दिलाने के लिए सहकारिता का त्रिस्तरीय ढांचा बनाया गया है। जिला स्तरीय यूनियन तथा शीर्ष स्तर पर म.प्र. राज्य लघु वनोपज संघ कार्यरत है। तेन्दूपत्ता श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिये “एकलव्य वनवासी शिक्षा विकास योजना” प्रारंभ की गयी। मेधावी बच्चों को सहायता राशि दी जाती लघु वनोपज आधारित 840 औषधियां बनाने का लाईसेंस मिला है और 350 औषधियों का निर्माण किया जा रहा है।लघु वनोपज संग्राहकों को वनोपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य शासन द्वारा 32 प्रमुख लघु वनोपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी घोषित किया गया है ताकि यदि बाजार में उचित मूल्य न हो तो संग्राहक को वनोपज का उचित मूल्य मिल सके। इस प्रकार प्रथम वर्ष के अनुभव से ग्राम सभाओं को लघु वनोपज व्यापार का अनुभव प्राप्त हुआ, तेंदुपत्ता संग्रहण एवं विपणन के लिए आत्मविश्वास मिला तथा इस वर्ष 229 ग्राम सभाओं द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य प्रारंभ हुआ।