अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस मनाया। खुशी बहुत जरूरी-श्रीमती निशा सिंह
सीहोर। सामान्य रूप से हर इंसान की जिंदगी में तनाव है। लोग 100 साल की जिंदगी एक साल में जीना चाहते हैं, इसलिए तनाव में रहते हैं। तनाव भौतिकवादी और उपभोक्तावादी लाइफस्टाइल के कारण भी बढ़ा है। पिछले कई सालों से सामाजिक स्तर पर तनाव का स्तर बढ़ा है। उक्त विचार शहर के सैकड़ाखेड़ी स्थित संकल्प वृद्धाश्रम में बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस मनाया गया था। इस मौके पर श्रद्धा भक्ति सेवा समिति की अध्यक्ष श्रीमती निशा सिंह ने कहे। यहां पर निवासरत वृद्धजनों के मध्य भजन-कीर्तन के साथ आनंद के पल बीते गए थे। उन्होंने कहा कि जीवन कठिन हो सकता है. कभी-कभी, यह हम पर नकारात्मक प्रभाव डालता है जिससे हम तनावग्रस्त, चिंतित, अभिभूत और अन्य नकारात्मक भावनाओं का अनुभव कर सकते हैं। लेकिन तमाम उथल-पुथल के बीच, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि खुशी कोई मंजिल नहीं, बल्कि एक यात्रा है। वास्तव में, यह कुछ ऐसा है जिसे हम वर्तमान समय में विकसित कर सकते हैं, भले ही हमारे सामने कितनी भी चुनौतियाँ हों।
इस दौरान यहां पर निवास रत वृद्धजनों को संबोधित करते हुए समिति की अध्यक्ष श्रीमती सिंह ने कहा कि नशा मुक्ति केन्द्र और वृद्धाश्रम में निवास करने वाले प्रसन्न रहे इसके लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम में उज्जैन शनि मंदिर के पुजारी सचिन त्रिवेदी ने कहा कि मनुष्य सुख शांति और दुखों का स्वयं जिम्मेदार है। मनुष्य ने ज्ञान-विज्ञान के दम पर जीवन को सरल बनाया है,जीवन जीने के तरीके बदले हैं। भौतिक सेवाएं अपने श्रेष्ठतम पर हैं, मनुष्य ने तकनीकी उपकरणों से शारीरिक और मानसिक श्रम को बहुत कम कर लिया है फिर भी सुख, शांति, प्रसन्नता और सुकून की तलाश में पूरी दुनिया में भटक रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश जहाँ आध्यात्मिक शक्ति से वशीभूत होकर विश्व भर से लोग शांति की तलाश में खिंचे चले आते हैं उस देश के लिए ये रिपोर्ट चौकाने वाली है। भारत अपने रंगीन संस्कृतिक जिंदादिली के लिए पहचाना जाता है, जिसके ज्ञान का प्रकाश सारे जगत को रोशन करता है आज वो खुद को खुद से प्रसन्न रखना क्यों भूल रहा है। मनुष्य ने सुख चैन की तलाश में मुस्कुराहट खो दिया है, अच्छा जीवन जीने के लिए व्यक्ति का खुश रहना बेहद जरूरी है। हमारे शास्त्र कहते हैं हम सब का उद्देश्य एक है दुखों से निवृत्ति पाना और सुख की प्राप्ति करना, सुख प्रसन्नता में निहित होती है।
