प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सीहोर द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव स्वर्णिम भारत की ओर अभियान
मूल्यों की शिक्षा को पढ़ाई के साथ जोड़ना आवश्यक-बीके पंचशीला
सीहोर। वर्तमान में मूल्यों की शिक्षा को पढ़ाई के साथ जोड़ा बहुत जरूरी है। अगर बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहते है, जिससे बच्चे बड़े होकर भी अपने नैतिक मूल्यों को नहीं भूलें। इसके लिए सभी स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए नैतिक शिक्षा पढ़ाई कराई जाना जरूरी है। उक्त विचार रविवार को शहर के अवधपुरी के समीपस्थ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाधान में आजादी के अमृत महोत्सव स्वर्णिम भारत की ओर अभियान के अंतर्गत शिक्षक वर्ग के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर सेवाकेंद्र प्रभारी बीके पंचशीला बहन ने अपने संबोधन में बताया कि मूल्यों की शिक्षा को पढ़ाई के साथ जोड़ना अतिआवश्यक है।
इस दौरान नसरुल्लागंज सेवाकेंद्र प्रभारी बीके माला बहन ने बताया कि किस तरह आज भावनात्क बुद्धिमत्ता की जरूरत है और कैसे ध्यान के माध्यम से बुद्धि की एकाग्रता बढ़ती है, इछावर सेवाकेंद्र प्रभारी बीके अंतिम बहन ने शिक्षकों को मूल्यनिष्ठ पाठयक्रम शामिल करने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन बीके ज्योति बहन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ, संचालन कार्य बीके मधु बहन द्वारा किया गया।
शिक्षा के लिए मेडिटेशन जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक डॉ श्रवण पचौरी ने बताया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से युवा अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। मेडिटेशन (दिमागी अभ्यास) एक बेहतरीन तरीका है। यह हमें मौजूदा समय में रहने की शिक्षा देता है, ताकि हम प्रयास करने के बेहतर प्रबंध के साथ अच्छे समय का आनंद उठा सकें. यह हमें हमारे सच्चे भाव के साथ जुड़े रहने में मदद करता है। अध्ययन का संबंध ध्यान को मौजूदा समय में एकाग्रचित करने से है, जो हमारी बेहतर एकाग्रता, ध्यान केंद्रित करने और स्मरणशक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। वहीं विशेष अतिथि उत्कृष्ट के प्राचार्य रविन्द्र कुमार वांगरे ने मन की एकाग्रता के ऊपर व्याख्यान दिया। अंत मे बीके नेहा बहन ने योगाभ्यास द्वारा सभी को आत्म अनुभूति कराई तथा महा प्रसादी का वितरण किया गया। कार्यक्रम में सीहोर क्षेत्र के समस्त शिक्षक एवं शिक्षाकाओं सहित समस्त बीके भाई बहने उपस्थित थे।
