अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर संगोष्ठी का आयोजनबालिका शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण को महत्व देना होगा-हर्षिता परमार
सीहोर। बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण को महत्व देना होगा तथा बालिकाओं को अधिकारों के बारे में जागरूक करना होगा। तभी समाज सुदृढ़ तथा उज्जवल होगा। आज बालिकाएं अपने अधिकार को लेकर जागरूक हुई है। सफलता के नए-नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। बावजूद इसके अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उक्त विचार शहर के चाणक्यपुरी में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंगलवार को प्रियल वेलफेयर फाउंडेशन के तत्वाधान में चार दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ अवसर पर फाउंडेशन की कार्यकर्ता हर्षिता परमार ने कहे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार लगातार बेटियां को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है जैसे सुकन्या योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ इन योजनाओं से बालिकाओं को इंपावर और शिक्षित करना है।
इस मौके पर यहां पर मौजूद छात्रा अंजली यादव ने दिवस का महत्व बताते हुए कहाकि संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर, 2011 को प्रस्ताव पारित किया। पूरी दुनिया में 11 अक्टूबर को अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का फैसला किया गया। 2012 को पहली बार दिवस मनाया गया। आज सभी बालिकाएं स्कूल जाने लगी हैं। पढ़ाई पूरी कर अपने कैरियर का निर्माण कर रही है। समाज में बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। निश्चित रूप से बड़ा काम हुआ है। हर साल विश्व स्तर पर बेटियों के सम्मान में और उनके संरक्षण के लिए मनाया जाता है। यह दिन बेटियों के लिए समर्पित है। आज के दौर में बिटियां अपनी ख्वाहिशों को एक नई उड़ान दे रही हैं, अब समय बदल गया है लेकिन फिर भी कई क्षेत्रों में जगहों में और देशों में बेटियों को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। बालिका दिवस यह बताता है कि समाज में बेटियों का अधिकार बेटों के समान है। इस दौरान यहां पर मौजूद अंजली, ज्योति, रक्षा राठौर, जया, धापू, हिमांशी अहिरवार, टीना, महिमा और रानी आदि छात्राओं ने भी संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त किए।
