एनएमएमएस से उपस्थिति व्यवहारिक नहीं-सीएसआर रेट में बदलाव और नेटवर्क समस्या आ रहीं, सरपंच संघ लामबंद हुआ
सीहोर। बुधवार को कलेक्ट्रेट में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय सरपंच संघ एवं सरपंच एकता कल्याण संघ की जिला इकाई ने केंद्रीय पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौपा हैं। जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने अपनी समस्याओं को रखते हुए कहा कि यदि हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जिले के सभी सरपंच आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
संघ के जिलाध्यक्ष एलम सिंह दांगी ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत श्रमिकों की उपस्थिति एनएमएमएस के माध्यम किया जाना व्यवहारिक रूप में संभव नहीं है। वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भोपाल में हुए सरपंच सम्मेलन के दौरान घोषणा कर सीएसआर रेट में बदलाव करने, ग्रेबल मार्ग और जनभागीदारी निधि के बंद पड़े कार्यों को शुरू किए जाने की घोषणा की गई थी। जिससे हम लोगों को निर्माण कार्य करने में परेशानी आ रही है। अत: घोषणा के अनुसार जल्द से जल्द लागू किया जाए। नहीं तो राजधानी में उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान मांगे पूरी करने को लेकर नारेबाजी की गई।
यह है मांगे
1. जिन पंचायतों में नेटवर्क की समस्या होने के कारण एन एम एम एस के समय उपस्थिति देते समय नहीं हो पा रहा है इस हेतु आवश्यक विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
2. तकनीकी नेटवर्क की समस्या के कारण एनएमएमएस के माध्यम से दी जा रही श्रमिक प्रस्तुति दी अपलोड नहीं हो पाए तो इस स्थिति में सभी की उपस्थिति को एडिट करने का प्रावधान पूर्व की डीपीसी पीजी जीपी लॉगिन के माध्यम से कराया जाए।
3. किसी भी योजना अंतर्गत ग्राम पंचायत में अधिकतम 20 प्रतिशत कार्यों की सीमा को हटाया जाए।
4. मनरेगा योजना अंतर्गत कार्य पूर्व की भांति ऑफलाइन मस्टररोल पर ही कार्य कराया जाए।
5. निर्माण कार्यों में 70 प्रतिशत सामग्री और 30 प्रतिशत मजदूरी का अनुपात रखा जाए।
6. सामग्री का भुगतान मूल्यांकन के साथ कराया जाए और डीएससी ग्राम पंचायत को दिया जाए।
7. कुशल श्रमिक का भुगतान श्रमिकों के साथ किया जाए।
8. नरेगा 2005 में ग्राम पंचायत में वित्तीय अधिकार थे उन्हें लागू किया जाए।
9. मनरेगा योजना मांग आधारित होना आधारित सभी निर्माण में अनिवार्यता खत्म हो।
10. पशु शेड निर्माण 60-40 अनुपात में चालू किया जाए।
