हरितालिका तीज पर महिलाओं ने रखा निर्जल व्रत, भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में उमड़ी आस्था
नर्मदा घाट पर सुबह से जुटी महिलाओं ने स्नान कर किया पूजन, रातभर हुआ जागरण
संजय शर्मा संवाददाता बुधनी
बुधनी। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में आज हरितालिका तीज का पर्व श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। परंपरानुसार महिलाओं ने सुबह नर्मदा घाट पर स्नान कर निर्जल व्रत की शुरुआत की और शाम को भगवान शंकर-गौरी का पूजन किया। दिनभर बिना अन्न-जल ग्रहण किए महिलाओं ने शाम को विशेष पूजन-अर्चना कर अखंड सौभाग्य की कामना की।
पूजन का आयोजन नगर के पंडित राकेश पराशर के आचार्यत्व में सम्पन्न हुआ। परंपरा अनुसार रातभर जागरण किया जाएगा जिसमें भोलेनाथ के भजन गाए जाएंगे और वातावरण शिवमय होगा। तीज व्रत में विशेष रूप से पाँच आरतियों का महत्व माना जाता है, जिन्हें महिलाएँ पूरी श्रद्धा से संपन्न किया। प्रातः नर्मदा घाट पर पूजन सामग्री का विसर्जन किया गया।
पूजन में नगर की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से श्रीमती कंचन शर्मा, श्रीमती सुजाता विश्वकर्मा, श्रीमती मंजू परमार, श्रीमती मोहिनी शर्मा, भावना शर्मा, विमला वर्मा, शांति वर्मा, मनीष पाराशर सहित अनेक महिलाएँ शामिल हुईं। सभी ने श्रृंगार कर पारंपरिक वेशभूषा में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की आराधना की। हरितालिका तीज का महत्व: पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप और निर्जल व्रत किया था। इसी के परिणामस्वरूप उनका विवाह भोलेनाथ से हुआ। तभी से यह पर्व अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की कामना के लिए महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन निर्जल व्रत रखकर और रात्रि जागरण कर पूजन करने से सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है, वहीं कुंवारी कन्याओं को योग्य वर मिलता है। नगर में जगह-जगह महिलाओं की टोलियाँ मिलकर भजनों का आयोजन कर रही हैं। नर्मदा घाट और मंदिरों में दिनभर पूजा-अर्चना और दर्शन का सिलसिला चलता रहा।

