नवजात बच्चे को घर ले जाने के लिए घंटों तक 108 एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई
मुकेश मेहता



मध्य प्रदेश के बुधनी क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रेहटी के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी और नवजात बच्चे को घर ले जाने के लिए घंटों तक 108 एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। मजबूरन, उन्हें निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा।
भोलाराम नाम के इस व्यक्ति ने अपनी पत्नी सीमा को डिलीवरी के बाद वापस अपने गांव खजूरी ले जाने के लिए 22 अगस्त को दो बार 108 एंबुलेंस को कॉल किया। उन्होंने घंटों तक इंतजार किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। भोलाराम का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 108 एंबुलेंस के चालक अक्सर पैसे की मांग करते हैं, और पैसे मिलने पर ही वे सेवा देते हैं। जबकि खजूरी तक सड़क पूरी तरह से बनी हुई है, इसके बावजूद उन्हें यह परेशानी झेलनी पड़ी।
अपनी समस्या को उजागर करने के लिए, भोलाराम ने इंतजार के दौरान का एक वीडियो और 108 एंबुलेंस बुक करने का मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
इस घटना के संबंध में जब मीडिया ने बुधनी के बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। वहीं, सीहोर के सीएचएमओ (चीफ हेल्थ एंड मेडिकल ऑफिसर) ने भी इस मामले में सीधे बात करने से इनकार करते हुए पहले बुधनी के बीएमओ से संपर्क करने की सलाह दी।
यह घटना मुख्यमंत्री की उन कोशिशों पर सवाल खड़ा करती है, जिनका उद्देश्य गरीब और ग्रामीण लोगों तक मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इस मामले में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा प्रतीत होता है, जो सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सीधा असर डाल रहा है। यह जरूरी है कि इस मामले की जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।