“हम जनता के सेवक हैं, फिर कैसा स्वागत?” शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की नई परंपरा
महंगे बुके, शॉल और दुपट्टों की जगह गरीबों की मदद करें, वही मेरा सबसे बड़ा सम्मान होगा : शिवराज सिंह चौहान
सुने क्या कहा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने
मुकेश मेहता
शिवराज सिँह चौहान ने भेरूंदा में आयोजित एक कार्यक्रम में स्वागत-सत्कार की परंपरा को लेकर एक नई सोच प्रस्तुत करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का असली सम्मान जनता की सेवा में है, न कि महंगे बुके और शॉल में।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “हम जनता के सेवक हैं। जनता ने हमें जनप्रतिनिधि बनाकर सेवा का अवसर दिया है, फिर हमारा इतना स्वागत क्यों? हमें फूल-मालाओं और महंगे बुके की नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में सहभागी बनने की जरूरत है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अक्सर उनके स्वागत में 400 से 500 रुपये या उससे अधिक कीमत के फूलों के बुके भेंट किए जाते हैं, जो कुछ ही समय में मुरझा जाते हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इस धनराशि का उपयोग किसी जरूरतमंद की मदद में किया जाए।
उन्होंने कहा, “यदि आप मेरा स्वागत करना चाहते हैं तो किसी गरीब का इलाज करा दीजिए, किसी जरूरतमंद बच्चे को किताबें दिला दीजिए, किसी गरीब को कपड़े उपलब्ध करा दीजिए। उसकी रसीद मेरे पास लेकर आइए, मैं समझूंगा कि मेरा स्वागत हो गया।”
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि अब वे चाहते हैं कि उनके कार्यक्रमों में स्वागत की यह नई परंपरा अपनाई जाए। महंगे शॉल, दुपट्टे और बुके पर खर्च होने वाली राशि यदि समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण में लगेगी तो उससे कई परिवारों के चेहरे पर मुस्कान आएगी।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व जनता की सेवा करना है और सेवा से बड़ा कोई सम्मान नहीं हो सकता। उनका यह संदेश कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और लोगों ने इसे समाज को नई दिशा देने वाली पहल बताया।
