आईटीआई संस्थानों के निजीकरण के विरोध में छात्रों का उग्र प्रदर्शन चकल्दी में विशाल जागरूकता रैली, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

गरीब, आदिवासी और ग्रामीण विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ का लगाया आरोप
मुकेश मेहता
सीहोर/चकल्दी
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के 16 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को निजी हाथों में सौंपने की प्रस्तावित योजना के विरोध में ग्राम चकल्दी स्थित एकलव्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों ने बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र संगठन के बैनर तले सैकड़ों विद्यार्थियों ने गांव में विशाल जागरूकता रैली निकालकर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। रैली के बाद आयोजित नुक्कड़ सभा में वक्ताओं ने निजीकरण के फैसले को छात्र, युवा और जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
विद्यार्थियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पूरे गांव में रैली निकाली तथा आमजन को निजीकरण के संभावित दुष्परिणामों से अवगत कराया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि सरकार जनता के टैक्स के पैसे से निर्मित सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को निजी कंपनियों के हवाले कर रही है, जिससे गरीब, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों की तकनीकी शिक्षा प्रभावित होगी।
छात्र संगठन की इकाई अध्यक्ष आरती बरकड़े ने कहा कि सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों ने विद्यार्थियों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए बने संस्थानों का निजीकरण किया जा रहा है।
उपाध्यक्ष रामकिशोर उईके ने कहा कि करीब 12 वर्ष पहले करोड़ों रुपये की लागत से बने इस संस्थान को निजी हाथों में सौंपने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान निजीकरण का निर्णय लेकर विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बनाया गया है।
संगठन के सचिव गोविंद मसकोले ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को इसे व्यापार का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। वहीं पूर्व छात्र एवं संगठन के राज्य संयोजक संदीप ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा निजीकरण के फैसले को हर स्तर पर चुनौती दी जाएगी।
सभा के अंत में विद्यार्थियों ने सरकार से निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।