सीहोर नगर के गौरव दिवस पर विशेष महाकवि कालिदास ने अपनी कई ग्रन्थों की रचना सीहोर में की थी
गणेश मंदिर, राम मंदिर, शिव मंदिर, हनुमानगढ़ी जैसे मंदिर पेशवा कालीन स्थापत्य का बेजोड़ नमूना और जन आस्था के बड़े केन्द्र है
शरबती गेहूं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है सीहोर
सीहोर के इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है कुंवर चैनसिंह
सीहोर में 356 क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी

सीहोर प्राचीनकाल से ही धार्मिक, ऐतिहासिक, पौराणिक नगरी के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रसिद्ध रहा है। सीहोर का प्राचीन नाम सिद्धपुर है, जो यहां बहने वाली सीवन नदी के नाम पर रखा गया है। सीहोर चंद्रगुप्त, हर्षवर्धन, अशोक तथा राजा भोज से लेकर पेशवाओं के राज्य का अंग रहा है। महाकवि कालिदास ने अपने कुछ ग्रंथों की रचना भी सीहोर में ही की थी। महाकवि कालिदास से सीहोर के इस रिश्ते के कारण पहला कालिदास समारोह का शुभारंभ भी सीहोर में ही आयोजित किया गया था।
गेटवे ऑफ मालवा कहा जाने वाला सीहोर शहर दो हिस्सों में बँटा हुआ है। प्राचीन कस्बा और अंग्रेजों द्वारा 1818 में बसाई गई छावनी। छावनी में अंग्रेजों द्वारा बनाई गई इमारतें तो कस्बे में पेशवा कालीन इमारतों की झलक देखने को मिलती है। कस्बे में स्थित राम मंदिर, शिव मंदिर, हनुमानगढ़ी जैसे मंदिर पेशवा कालीन स्थापत्य का बेजोड़ नमूना है। लेकिन सीहोर की प्रसिद्धि उस पेशवा कालीन प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर से है, जो कस्बे के एक छोर पर बना हुआ है। कहते हैं कि इस प्रकार के मंदिर पूरे देश में केवल 4 स्थानों पर ही है। आज इस गणेश मंदिर से सीहोर की देशभर में पहचान है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश की यह प्रतिमा स्वयं उज्जयिनी के महाराजा विक्रमादित्य यहां लेकर आए थे।
सीहोर के संपूर्ण इतिहास में और अंग्रेजों के खिलाफ जंग का विगुल बजाने में नरसिंहगढ़ के राजा कुंवर चैन सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता है। कुंवर चैनसिंह ने 1857 की क्रांति से भी 33 साल पहले अंग्रेजों से सीहोर में लड़ते हुए 24 जुलाई 1824 को बलिदान गाथा में पहले अपना नाम दर्ज करवाया था। वह स्थान जहां अंग्रेजों के साथ वीरता से युद्ध करते हुए कुंवर चैन सिंह वीरगति को प्राप्त हुए थे, वहां आज भी उनकी छतरी बनी हुई है। इसी तरह 14 जनवरी 1858 को अंग्रेजों से बगावत करने वाले 356 क्रांतिकारियों को जनरल ह्यूरोज के आदेश पर सीवन नदी के किनारे सैकड़ाखेड़ी स्थित चांदमारी मैदान में गोलियों से भून दिया गया था। सैकड़ाखेड़ी रोड के पास चांदमारी मैदान में वीर क्रांतियों के स्मृति में शहीद स्थल बनाया गया है।
इसके अलावा सीहोर शरबती गेहूं की पैदावार के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। बड़ी-बड़ी कम्पनियां अपने गेहूं व आटे के पैकेट पर सीहोर का शरबती गेहूं नाम का उल्लेख बड़े अक्षरों में करते है। इसी तरह सीहोर की कचौड़ी भी प्रसिद्ध है। जो भी बाहरी व्यक्ति सीहोर आते है, वे सीहोर की स्वादिष्ट कचौड़ी को अपने साथ अवश्य ले जाते है। पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर में जो विकास की गंगा बहाई है वह विकास आज सीहोर में दिखाई दे रहा है। जगमगाती हुई चौड़ी सड़के, जिसमें सैकड़ाखेड़ी मार्ग और चौपाल सागर से चाणक्यपुरी का मार्ग शामिल है। जो कि शहर की सुंदरता में चार चांद लगाते है। इसी तरह कलेक्ट्रेट भवन, नवीन इन्डोर स्टेडियम, चन्द्रशेखर आजाद महाविद्यालय जैसी भव्य इमारतें मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा सीहोर शहर को दी गई अनेक सौगातों में से एक है।