बड़ी विशेष रिपोर्ट
मां नर्मदा के आबलीघाट की दुर्दशा — जिम्मेदारों की मिलीभगत से मां नर्मदा हो रही प्रदूषित
रेहटी/सीहोर।




मुकेश मेहता
पतित-पावनी मां नर्मदा, जिसे जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी माना जाता है, नर्मदा घाट आबलीघाट पर आज लापरवाह व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की भेंट चढ़ती दिख रही है। प्रसिद्ध नर्मदा घाट अबलीघाट पर हालात इतने खराब हो चुके हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था पर भी आघात पहुँचने लगा है।
गांव का गंदा पानी सीधे मां नर्मदा में प्रवाहित
स्थानीय लोगों के अनुसार सचिव और सरपंच की मिलीभगत से वर्षों से गांव का नाली-मलजल सीधे नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर यह गंदा पानी मिल रहा है, उसी स्थान पर श्रद्धालु प्रतिदिन स्नान, पूजन और आचमन करते हैं। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार आँखें मूंदे बैठे हैं।
गंदगी का अंबार — कूड़ा, कपड़े और प्लास्टिक बिखरे
घाट परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कूड़े-कचरे और गंदे कपड़ों का अंबार घाट की पवित्रता को तार-तार कर रहा है। साफ-सफाई के नाम पर केवल औपचारिकताएँ निभाई जा रही हैं, जबकि जमीन पर स्थिति बिल्कुल उलट है।
पार्किंग में मनमानी वसूली — हिसाब न कोई, नियंत्रण न कोई
नर्मदा घाट पर पार्किंग का ठेका देने के बाद ठेकेदार द्वारा खुली मनमानी की जा रही है। वाहनों से मनमाने तरीके से रुपए वसूले जा रहे हैं, लेकिन बदले में कोई सुविधा नहीं दी जा रही।
ठेकेदार को शर्तों के अनुसार घाट की साफ-सफाई सुनिश्चित करना थी, लेकिन नतीजा शून्य।
ना नियमित सफाई, ना गंदगी उठाने की व्यवस्था — उल्टा श्रद्धालुओं से वसूली जारी है।
स्थानीय जनता में आक्रोश, प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि घाट की बिगड़ती स्थिति पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि—
नर्मदा में मिल रहे गंदे पानी को तत्काल रोका जाए।
पार्किंग ठेकेदार की मनमानी पर लगाम लगाई जाए।
सचिव–सरपंच की जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।
घाट की नियमित साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
नर्मदा बचाओ — आस्था एवं स्वास्थ्य दोनों दांव पर
मां नर्मदा करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। यदि नदी में गंदगी और नाली का पानी मिलता रहा, तो यह न केवल धार्मिक आस्थाओं का अपमान है, बल्कि बड़े स्वास्थ्य संकट की चेतावनी भी है।
प्रशासन कब जागेगा? यह सबसे बड़ा प्रश्न है, जिसका जवाब पूरे क्षेत्र की जनता आज तलाश रही है।